ज्योतिष का पाठ्यक्रम

अपनी कुंडली खुद पढ़ना सीखिए।

पाँच छोटे अध्याय। न डर बेचना, न रत्न, न कठिन शब्द बिना समझाए। जो परंपरा सच में कहती है, वही — जैसे कोई अच्छा गुरु समझाता है।

इसे कैसे पढ़ें

पहली बार क्रम में पढ़िए। हर अध्याय पिछले पर बना है: भाव जीवन के मंच देते हैं, राशियाँ उन मंचों को एक मूड देती हैं, ग्रह पात्र लेकर आते हैं, और नक्षत्र भावनात्मक रंग जोड़ते हैं।

आख़िरी अध्याय दोषों पर है — मंगल, काल सर्प, साढ़े साती। यह इसलिए है कि दशकों से इन शब्दों का उपयोग डर बेचने के लिए किया गया है। हम बताएँगे कि इनका असल मतलब क्या है, और सच में क्या काम आता है।

हर अध्याय के अंत में एक गतिविधि है — अपनी कुंडली पर एक छोटा-सा प्रयोग। नीचे दी हुई कोरी कुंडली छाप लीजिए और साथ-साथ कीजिए।

अपनी कुंडली देखने के लिए तैयार हैं?

ऊपर पढ़ी हर बात अपनी कुंडली में देखते ही असली हो जाती है।

अपनी कुंडली बनाएँ