शब्दकोश

हर शब्द, सरल भाषा में।

वही शब्दकोश जिसे चैट में ज्योतिषी उपयोग करता है। ज्योतिष के हर शब्द — ग्रह, राशि, भाव, दशा, दोष, नक्षत्र — एक जगह, सरल भाषा में। नीचे खोजिए, या ‘/’ दबाइए।

कुल 41 में से 41

ग्रह(10)

ग्रह· Graha

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ज्योतिष का ग्रह। कुल नौ — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, और दो चंद्र-बिंदु राहु और केतु।

सूर्य· Sūrya (Sun)

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सूर्य। आत्मा, स्वयं, और पिता का कारक। सिंह राशि का स्वामी। मेष में उच्च, तुला में नीच। जहाँ सूर्य बैठा है, वहाँ आप छुप नहीं सकते।

चंद्र· Chandra (Moon)

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चंद्रमा। मन, भावनाओं, और माँ का कारक। कर्क राशि का स्वामी। वृषभ में उच्च, वृश्चिक में नीच। आपके मन का मौसम।

मंगल· Maṅgal (Mars)

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मंगल। साहस, भाई-बहन, और ऊर्जा का कारक। मेष और वृश्चिक का स्वामी। मकर में उच्च, कर्क में नीच। वह घर्षण जो आपको हिलाता है।

बुध· Budha (Mercury)

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बुध। बुद्धि, वाणी, और विद्या का कारक। मिथुन और कन्या का स्वामी। कन्या में उच्च, मीन में नीच। जिस ग्रह के साथ बैठे, उसका रंग ले लेते हैं।

गुरु· Guru (Jupiter)

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गुरु। शिक्षक — ज्ञान, संतान, और धर्म का कारक। धनु और मीन का स्वामी। कर्क में उच्च, मकर में नीच। गुरु जिसे छूते हैं, बढ़ा देते हैं।

शुक्र· Śukra (Venus)

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शुक्र। प्रेम, कला, और (पुरुष कुंडली में) पत्नी का कारक। वृषभ और तुला का स्वामी। मीन में उच्च, कन्या में नीच। आपका स्वाद और आपकी कोमलता।

शनि· Śani (Saturn)

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शनि। न्यायाधीश — अनुशासन, आयु, और सेवा का कारक। मकर और कुंभ का स्वामी। तुला में उच्च, मेष में नीच। जो शनि परखते हैं, वही अंत में मज़बूत होकर देते हैं।

राहु· Rāhu (North Node)

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चंद्रमा का उत्तर बिंदु — कोई भौतिक ग्रह नहीं, गणित का बिंदु है। जहाँ राहु हैं, वहाँ जीवन आपको उस ओर खींचता है जो आपके बचपन का नहीं था। महत्वाकांक्षा, भूख, अनजाना रास्ता।

केतु· Ketu (South Node)

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चंद्रमा का दक्षिण बिंदु — राहु के ठीक विपरीत। जहाँ केतु हैं, वहाँ आप पहले से जानते हैं — अक्सर पूर्व-जन्म से। जो पर्याप्त हो चुका है, केतु उसे त्यागने में मदद करते हैं।

राशियाँ(1)

राशि· Rāshi

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राशिचक्र का 30° का हिस्सा। कुल बारह राशियाँ हैं। जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में हो, वही आपकी 'चंद्र राशि' है — भारतीय ज्योतिष में सबसे बड़ी पहचान।

नक्षत्र(1)

नक्षत्र· Nakshatra

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आकाश का 13°20′ का हिस्सा — चंद्रमा का उस दिन का 'घर'। कुल 27 नक्षत्र हैं। आपका जन्म-नक्षत्र आपकी भावनात्मक पहचान बनाता है और दशा-क्रम तय करता है।

दशा(4)

दशा· Dashā

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एक अवधि जो किसी एक ग्रह के अधीन होती है; उस दौरान उस ग्रह के विषय जीवन में उभर आते हैं। विंशोत्तरी पद्धति में 120 साल की उम्र को नौ महादशाओं में बाँटा जाता है।

महादशा· Mahādashā

मुख्य ग्रह-अवधि — कुंडली का सबसे लम्बा 'मौसम'। जीवन में नौ महादशाएँ आती हैं। जो चल रही हो, वही पूरे युग का रंग तय करती है।

अंतरदशा· Antardashā

महादशा के भीतर की छोटी अवधि। कुछ महीनों से कुछ वर्षों तक की — बड़े मौसम के भीतर का मूड।

प्रत्यंतरदशा· Pratyantardashā

और छोटी अवधि — हफ़्तों से कुछ महीनों तक। महादशा और अंतरदशा के ऊपर की बारीक परत।

दोष(5)

साढ़े साती· Sāde Sāti

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लगभग साढ़े सात साल की वह अवधि जब गोचर का शनि आपकी चंद्र-राशि से पहले, उसी पर, और उसके बाद वाली राशि से गुज़रता है। लम्बे जीवन में यह तीन बार आती है। यह पूछता है कि जो बोझ आपका नहीं है, उसे रख दीजिए — दंड नहीं है।

मंगल दोष· Maṅgal Dosha

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एक कुंडली-चिह्न जब मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें, या बारहवें भाव में हो। लगभग आधी कुंडलियाँ इस श्रेणी में आती हैं — यह न दुर्लभ है, न श्राप। परंपरा इसे साझेदारी में रगड़ का विषय मानती थी, ज़िंदगी की सज़ा नहीं।

काल सर्प दोष· Kāl Sarp Dosha

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एक स्थिति जब सभी सात दृश्य ग्रह राहु-केतु धुरी के एक ही तरफ़ हों। शास्त्रीय ग्रंथ इसका नाम तक नहीं लेते — यह 20वीं सदी की देन है, जिसे बाज़ारी ज्योतिष ने लोकप्रिय किया। डरने से पहले इतना जान लीजिए।

नाड़ी दोष· Nāḍi Dosha

कुंडली-मिलान में उपयोग होने वाला एक चिह्न — जब दो जन्म-कुंडलियों के 'नाड़ी' समूह एक ही हों। इस पर मत भिन्न हैं — कुछ परंपराएँ इसे भारी मानती हैं, कुछ नहीं। कोई अंतिम फ़ैसला नहीं।

भकूट दोष· Bhakoot Dosha

कुंडली-मिलान का एक और चिह्न — जब दो साथियों की चंद्र-राशियाँ एक-दूसरे से कुछ विशेष 'अनुकूल नहीं मानी जाने वाली' दूरियों पर हों। यह एक कारक है, अंतिम फ़ैसला नहीं।

सिद्धांत(20)

कुंडली· Kundli

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आपकी जन्म-कुंडली — जन्म के समय आसमान का चित्र। यह जीवन के बारह भावों को बारह राशियों पर रखती है।

लग्न· Lagna

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लग्न — जन्म के समय पूर्व दिशा में उठती हुई राशि। यह आपके पहले भाव की राशि है, और इसका स्वामी पूरी कुंडली का सबसे ज़रूरी ग्रह होता है।

भाव· Bhāva

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कुंडली का एक भाव। बारह होते हैं, हर एक जीवन का एक क्षेत्र — पहला स्वयं, सातवाँ जीवनसाथी, दसवाँ करियर, इत्यादि।

गोचर· Gochara

गोचर — इस समय आसमान में ग्रह कहाँ हैं, जन्म के समय की तुलना में। हर व्यक्ति का गोचर एक जैसा होता है; अंतर इसमें है कि वह आपकी जन्म-स्थिति पर कैसे असर करता है।

दृष्टि· Drishti

दृष्टि — एक ग्रह का दूसरे भाव पर 'देखना'। हर ग्रह अपने से सातवें भाव को देखता है; शनि, मंगल, और गुरु की कुछ अतिरिक्त दृष्टियाँ भी होती हैं।

योग· Yoga

ग्रह-स्थितियों का एक विशेष संयोग। गजकेसरी, पंच महापुरुष, विपरीत राज — हर योग एक विशेष रचना है, जो 'सक्रिय' होने पर कुंडली के किसी विषय को मज़बूत करता है।

कारक· Kāraka

किसी विषय का प्राकृतिक कारक। सूर्य पिता और स्वयं का कारक; चंद्र माँ और मन का; शुक्र (पुरुष कुंडली में) जीवनसाथी का; गुरु संतान और ज्ञान का।

केंद्र· Kendra

कोणीय भाव — पहला, चौथा, सातवाँ, और दसवाँ। इन भावों में बैठे ग्रह जीवन में मुखर होते हैं; उनके विषय सामने आते हैं।

त्रिकोण· Trikona

त्रिकोण भाव — पहला, पाँचवाँ, नवाँ। ये भाव भाग्य और धर्म का घर हैं; इनके स्वामी ग्रह शुभ माने जाते हैं, चाहे वे अन्य जगहों पर कैसे भी हों।

स्वामी· Swāmi

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किसी राशि का स्वामी ग्रह। मंगल — मेष और वृश्चिक का; शुक्र — वृषभ और तुला का; इत्यादि। अपनी ही राशि में बैठा ग्रह आराम में और मज़बूत होता है।

उच्च· Uchcha

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उच्च — हर ग्रह की एक ऐसी राशि है जहाँ उसके गुण सबसे अच्छे खिलते हैं — गुरु कर्क में, मंगल मकर में, शनि तुला में।

नीच· Neecha

नीच — किसी ग्रह की उच्च राशि के ठीक विपरीत, जहाँ उसके गुण जूझते हैं। मंगल कर्क में, शनि मेष में, इत्यादि।

वक्री· Vakri

वक्री — पृथ्वी से देखने पर ग्रह पीछे की ओर चलता दिखता है। वक्री ग्रह अक्सर पुराने प्रश्नों और भीतरी विषयों पर काम करते हैं — नई शुरुआत के बजाय पुनरावलोकन।

अस्त· Asta

अस्त — जब ग्रह सूर्य के इतने पास हो कि उसकी रोशनी सूर्य में डूब जाए। ऐसा ग्रह अपना असर हल्का करता है या भीतर की ओर मोड़ लेता है।

वर्गोत्तम· Vargottama

जब कोई ग्रह जन्म-कुंडली (D1) और नवमांश (D9) — दोनों में एक ही राशि में हो। इसे ग्रह की मज़बूती का चिह्न माना जाता है।

अयनांश· Ayanāmsha

पश्चिमी ज्योतिष के 'सायन' राशिचक्र और भारतीय 'निरयण' राशिचक्र के बीच का अंतर। लाहिरी अयनांश भारतीय परंपरा में सबसे प्रचलित है — इस समय लगभग 24°।

गजकेसरी योग· Gajakesari Yoga

यह योग तब बनता है जब गुरु चंद्रमा से केंद्र भाव (पहला, चौथा, सातवाँ, या दसवाँ) में हों। समझदारी, अच्छा नाम, और लम्बी स्थिरता देता है।

पंच महापुरुष योग· Pañcha Mahāpurusha Yoga

पाँच योगों का समूह — रुचक (मंगल), भद्र (बुध), हंस (गुरु), मालव्य (शुक्र), शश (शनि)। हर एक तब बनता है जब वह ग्रह अपनी या उच्च राशि में और लग्न से केंद्र में हो। यह एक 'खड़े होने' का चिह्न है।

विपरीत राज योग· Vipareeta Rāja Yoga

यह योग तब बनता है जब 'कठिन' भावों (6, 8, 12) के स्वामी आपस में एक-दूसरे के भावों में बैठे हों। कठिनाई से उठान — असम्भव-सी दिखने वाली राहों से सफलता।