अध्याय 2 · राशियाँ

बारह राशियाँ — आसमान के मूड

अगर भाव जीवन के मंच हैं और ग्रह पात्र, तो राशियाँ वे मूड हैं जिनमें पात्र मंच पर आते हैं। हर राशि आकाश का 30° हिस्सा है — बारह मूड, एक पूरा वृत्त।

हर राशि के बारे में तीन बातें

हर राशि की तीन विशेषताएँ होती हैं — तत्व, स्वभाव, और स्वामी। ये तीन जान लीजिए, तो राशि की चाल आपको समझ आ जाएगी।

  • तत्व अग्नि चलती है, पृथ्वी बनाती है, वायु सोचती है, जल महसूस करता है। जिस तत्व से राशि बनी है, वही उसका ईंधन है।
  • स्वभाव चर राशियाँ शुरू करती हैं, स्थिर राशियाँ थामकर रखती हैं, द्विस्वभाव राशियाँ बदल देती हैं। हर ऋतु में तीनों एक-एक हैं।
  • स्वामी हर राशि का एक स्वामी ग्रह है — जिसका मूड उस राशि में सबसे ज़्यादा दिखता है। मंगल — मेष और वृश्चिक; शुक्र — वृषभ और तुला; इत्यादि।

बारह — एक-एक करके

राशि 1

मेष

तत्व
अग्नि
स्वभाव
चर
स्वामी
मंगल

सीधे, साहसी, जल्दी शुरू करने वाले। नेतृत्व चाहते हैं। धीमेपन से जल्दी झुँझला जाते हैं।

राशि 2

वृषभ

तत्व
पृथ्वी
स्वभाव
स्थिर
स्वामी
शुक्र

स्थिर, कोमल, धैर्यवान। सुख, सुंदरता, और गहरी बात पसंद। ज़बरदस्ती से चिढ़ते हैं।

राशि 3

मिथुन

तत्व
वायु
स्वभाव
द्विस्वभाव
स्वामी
बुध

जिज्ञासु, चंचल बुद्धि, संवाद-प्रिय। नए विचार और छोटी यात्राएँ पसंद। कभी बिखर जाते हैं।

राशि 4

कर्क

तत्व
जल
स्वभाव
चर
स्वामी
चंद्र

भावुक, रक्षक, गहरी सहज-बुद्धि। घर-परिवार पहले। एक कमरे का मूड तुरंत भाँप लेते हैं।

राशि 5

सिंह

तत्व
अग्नि
स्वभाव
स्थिर
स्वामी
सूर्य

बड़ा दिल, राजसी स्वभाव, उदार। पहचान चाहते हैं — पर सेवा से कमाई हुई पहचान।

राशि 6

कन्या

तत्व
पृथ्वी
स्वभाव
द्विस्वभाव
स्वामी
बुध

विश्लेषक, बारीक नज़र, सेवा-भावी। छोटी बातें पहचानते हैं। दयालुता छोटे कामों में दिखती है।

राशि 7

तुला

तत्व
वायु
स्वभाव
चर
स्वामी
शुक्र

संतुलित, कलाप्रिय, कूटनीतिक। रिश्ते ही मंच हैं। किसी एक तरफ़ खड़े होने में दिक़्क़त होती है।

राशि 8

वृश्चिक

तत्व
जल
स्वभाव
स्थिर
स्वामी
मंगल

गहरी तीव्रता, अंतर्मुखी, बदलाव-प्रिय। ऊपरी बातचीत पसंद नहीं। या तो गहराई, या कुछ नहीं।

राशि 9

धनु

तत्व
अग्नि
स्वभाव
द्विस्वभाव
स्वामी
गुरु

दार्शनिक, आशावादी, स्वतंत्रता-प्रेमी। हर काम के पीछे अर्थ चाहिए। पिंजरे नहीं भाते।

राशि 10

मकर

तत्व
पृथ्वी
स्वभाव
चर
स्वामी
शनि

अनुशासित, धैर्यवान, पहाड़ी धैर्य। जो बनाते हैं वो टिकता है। सफलता देर से आती है, पर मज़बूत।

राशि 11

कुंभ

तत्व
वायु
स्वभाव
स्थिर
स्वामी
शनि

स्वतंत्र, अनोखे विचार, समाज-प्रिय। बड़ी तस्वीर देखते हैं। पास से थोड़े ठंडे, दूर से गर्मजोशी।

राशि 12

मीन

तत्व
जल
स्वभाव
द्विस्वभाव
स्वामी
गुरु

सहानुभूति, स्वप्नशील, आध्यात्मिक। दूसरों का दुख अपना लगता है। सेवा में लगे रहते हैं — कभी विश्राम भूल जाते हैं।

एक छोटी याद-रखने की तरकीब

राशिचक्र बेतरतीब नहीं है। क्रम ऐसा है: अग्नि → पृथ्वी → वायु → जल — तीन बार दोहराता है। और हर तत्व के भीतर एक शुरू करती है, एक टिकाकर रखती है, एक बदल देती है। बस इतनी सी बात है।

मेष (अग्नि, चर) शुरू करती है। वृषभ (पृथ्वी, स्थिर) टिकाती है। मिथुन (वायु, द्विस्वभाव) बदल देती है। फिर कर्क (जल) से नया चक्र शुरू।

गतिविधि · अपनी राशि पहचानिए

अपनी कुंडली खोलिए। चंद्रमा को ढूँढिए — वह किस राशि में बैठा है, वही आपकी चंद्र राशि है — भारतीय ज्योतिष में सबसे बड़ी पहचान।

फिर ऊपर उस राशि का कार्ड पढ़िए। खुद से पूछिए: क्या यह मूड आपके अंदर के अनुभव से मिलता है?

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